ऑस्ट्रेलिया में Cheteshwar Pujara का legacy : दीवार की तरह खड़े रहने वाले योद्धा की कहानी

ऑस्ट्रेलिया में Cheteshwar Pujara का legacy : दीवार की तरह खड़े रहने वाले योद्धा की कहानी

नमस्ते दोस्तों! अगर आप क्रिकेट के दीवाने हैं, तो चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) का नाम सुनते ही दिमाग में एक मजबूत दीवार की तस्वीर उभर आती होगी। वो खिलाड़ी जो रन बनाने से ज्यादा, विकेट बचाने में माहिर था। ऑस्ट्रेलिया (Australia) जैसी मुश्किल सरजमीं पर जहां तेज गेंदबाजों का राज चलता है, वहां पुजारा (Pujara) ने न सिर्फ रन बनाए, बल्कि भारत की ऐतिहासिक जीतों की नींव रखी। आज हम बात करेंगे पुजारा के ऑस्ट्रेलिया में उन शानदार पारियों की, जिन्होंने उन्हें ‘दी न्यू वॉल’ का खिताब दिलाया। ये आर्टिकल उन सभी क्रिकेट प्रेमियों के लिए है जो जानना चाहते हैं कि कैसे एक सौराष्ट्र का लड़का कंगारुओं की धरती पर राज करने लगा।

Pujara का ऑस्ट्रेलिया कनेक्शन: शुरुआत से ही जुझारू

चेतेश्वर पुजारा ने अपना टेस्ट डेब्यू 2010 में ऑस्ट्रेलिया (Cheteshwar Pujara Australia) के खिलाफ ही किया था, जहां उन्होंने दूसरी पारी में 72 रन बनाकर भारत को जीत दिलाई लेकिन असली legacy तो ऑस्ट्रेलिया की सरजमीं पर बना। पुजारा ने कुल 103 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 7195 रन बनाए, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में उनका औसत 49.38 रहा – घरेलू और विदेशी दोनों में वो SENA देशों (साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया) में भारत के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक हैं

अब चलिए उन खास पारियों पर नजर डालते हैं, जो पुजारा (Pujara) की ऑस्ट्रेलिया कहानी को अमर बनाती हैं।

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ऑस्ट्रेलिया में Cheteshwar Pujara का legacy : दीवार की तरह खड़े रहने वाले योद्धा की कहानी

एडिलेड की जंग: जहां Cheteshwar Pujara ने दीवार खड़ी की

एडिलेड ओवल पुजारा के लिए लकी ग्राउंड रहा। 2014-15 सीरीज में उन्होंने 73 रन की पारी खेली, जो उस समय का भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण थी। फिर उसके बाद साल 2018-19 में तो कमाल ही हो गया – पहली पारी में 123 रन (जिसमें उन्होंने 246 गेंदें खेलीं) और दूसरी में 71 रन। इन पारियों की बदौलत भारत ने एडिलेड टेस्ट 31 रनों से जीता

सोचिए, ऑस्ट्रेलिया में जहां बल्लेबाज जल्दी आउट हो जाते हैं, वहां पुजारा (Cheteshwar Pujara) ने घंटों समय तक क्रीज पर टिककर विरोधी गेंदबाजों को धोते रहे। ये पारियां न सिर्फ रनों की थीं, बल्कि टीम को समय देने की भी।

मेलबर्न में शतक: बॉक्सिंग डे का हीरो

2018-19 सीरीज का मेलबर्न टेस्ट याद है? पुजारा ने 106 रन की पारी खेली, जो भारत की जीत की कुंजी बनी। इस शतक में उन्होंने 280 गेंदें खेलीं, और भारत ने वो मैच 137 रनों से जीता। पुजारा की ये पारी दिखाती है कि कैसे वो दबाव में भी शांत रहते थे। सीरीज में पुजारा (Pujara) ने कुल 1258 गेंदें खेलीं – किसी विदेशी बल्लेबाज का रिकॉर्ड सिडनी का सितारा: 193 रनों की महाकाव्य पारी

सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर पुजारा का जादू चला। 2018-19 में उन्होंने 193 रन बनाए – उनकी सबसे बड़ी पारी ऑस्ट्रेलिया में 373 गेंदों पर 22 चौकों के साथ ये स्कोर आज भी याद किया जाता है। फिर 2020-21 सीरीज में सिडनी में ही 50 और 77 रन की पारियां खेलीं, जो भारत को ड्रॉ कराने में मददगार रहीं। इन पारियों में पुजारा ने दिखाया कि रन बनाने से ज्यादा, मैच बचाना भी एक कला है।

ब्रिस्बेन का बहादुर: 56 रन जो इतिहास रच गए

2020-21 सीरीज का ब्रिस्बेन टेस्ट – गाबा का किला, जहां ऑस्ट्रेलिया 32 साल से नहीं हारी थी। पुजारा ने 56 रन बनाए, लेकिन इसके लिए 211 गेंदें खेलीं शरीर पर कई गेंदें लगीं, लेकिन वो डटे रहे। इसी पारी की बदौलत भारत ने वो मैच जीता और सीरीज 2-1 से अपने नाम की। पुजारा की ये पारी बताती है कि क्रिकेट सिर्फ रनों का खेल नहीं, धैर्य और जुझारूपन का भी है। पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया में तीन शतक लगाए और कई अर्धशतक

2018-19 में भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीती, और पुजारा मैन ऑफ द सीरीज बने। 2020-21 में चोटिल टीम के साथ भी भारत ने जीत हासिल की, जिसमें पुजारा की भूमिका अहम थी। उन्होंने कुल 2000 से ज्यादा रन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बनाए

लेकिन अब, 2025 में पुजारा (Cheteshwar Pujara) ने सभी फॉर्मेट से रिटायरमेंट ले लिया है, पर उनका legacy हमेशा जिंदा रहेगा।


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मेरा नाम राज मल्होत्रा है और मैं एक कंटेंट राइटर का काम करता  हूँ, पिछले 5+ सालों से SEO-friendly और engaging कंटेंट मै इसी पर लिख रहा हूँ।

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